दिल की आवाज लैला मजनूं से...
अपनों से बेरुखी प्यार का नारा है
जन्म से लेकर अंत तक प्यार दुलरा हैं
पलको में जिन्हें बिठाके रखा था जिसे
आज वह दो कदम दूर चले जाने को हैं
जिन्हें छाया के रूप में दिल में पिरोया था
आज वह लैला मजनूं का खेल खेला हैं।
हसरते थे जिन्हें अपना बनाने का
जिन्हें दिल से हमने फिरोया था
आज वह दूर जाने को हैं
क्या गजब की दासता था
दिल में जिन्हें सदा के लिए बसाया था
लैला मजनूं का खेल खेला हैं
मेरा आँखों आज उस परी के लिए रोया हैं।
इश्क़ में दिल तनहा होगया हैं
बेरुखी गजब की प्यार ने मोड़ ले लिया हैं
दिल की नादानी बड़ी गरल हैं
हौसले तो है बड़ी बेख़ुदी सी
लाचार होगया है मेरा दिल
उस प्यार के समय से
आज बड़ी हसरत से जाने को तैयार हैं।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
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