जाना तो आखिर आर्थी में हैं
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
जबसे मांजी को देखा हूँ
सोच में पड़ा हू
आर्थी मिलेगा की नही
वक्त से पहले जख्म का
काफिला मिलेगा
युही इंसानियत को शर्मसार मत कर ।
अंतिम स्टॉप पास हैं
ले जाने वाला कोई साथ हैं
जो हो न सका हैं उसका आस हैं
शव को कंधा मिलेगा या नही
बेपरवाह लोग हो जाते हैं
ये प्रश्न से हमारे इनसानियत शर्मसार हैं।
समाज बारबार शर्मसार हैं
आज एक गरीब मांजी के लिए
कल था एक बेटी के लिए
आदमी आदमी को खिलौना सा खेल
गरीब को लात दे रहे हैं
कल न जाने क्यों शर्मसार होगा??
किस बात का घमण्ड पाले रखे हो
मिट्टी में आखिर मिल तो जाना हैं
ये आवास मरने के बाद कुछ नही
दूसरे के लिए जीना ही स्वर्ग हैं
आखिर जाना तो आर्थी में हैं
काफिला तो मिलेगा।।।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
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