बेटी के नाम सितारे जड़े मोती
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
बढ़ी अचानक शत्रुओ का प्रहार
भारत मिट्टी में मिलने को था
लाज न बची थी भारत की तब
एक बेटी आई थी आहेलिया बाई।
अंतिम श्वास तक लड़ी बेटी ने
जीत के लिए सन्तान का त्याग
अंग्रेजो का पथराव जब हुआ
तब लक्ष्मी बाई ने लौह लिये।
राजनीति में जब पढ़ी प्रहार
सत्ता के भुखे थे हजार लोग
जब सत्ता में घोटाले हुए तब
आई थी इन्दिरा गाँधी मेम।
काव्य की पाठ से अनजान थे
आजादी की लड़ाई में कुर्बान थे
आजदी की हलाबोल में रचना की
भारत कोकिला सरोजनी बाई ने।
कलयुग की मीरा बनी महादेवी ने
काव्य पाठ को नई मुकाम दी
जीवन को प्रकृति में संजोया
उच्ची उड़ान का हिम्मत मिला।
महिला अनजान थी विज्ञान से
सरलता का पाठ विज्ञान ने दिए
पहली महिला नाम सुमेरने वाली
अन्तरिक्ष में जाने वाली कल्पना बनी।
सभी के पास हजारो मेडल हैं
अपनी जमीन पर रोये हैं लोग
रियो ओलम्पिक में झुकी हुई थी सिर
ऊचा की भारत की बेटी साक्षी सिंधु ने।
जुगनुओं से लड़ी आंधी जैसे बढ़ी
शिखर तक जाकर जीत की नाम दी
कोख में युहि मत कुचलो देश की
भविष्य जीने दो उन्हें भी बेटी को।।
बेटी बचाओ देश का कल बनाओ
जय हिन्द जय छत्तीसगढ़
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें