"दोस्ती के अल्फाज"
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
दिल की आस है वर्षो से दिल प्यास है,
जीवन की आड़ले में प्यार सा दिन रहे।
इन दिनों ये पक्षी दुनिया से अंजान है,
फिर भी दोस्त के साथ उड़ने को है।
दिलो की आस है दोस्त का प्यार है,
दिन खुबसूरत सी है प्यार की आस है।
तूफान कहु या आंधी दोनों मेरे दोस्त हैं,
दोस्त कहु या यार दोनों में अल्फाज हैं।
ये परिन्दे दोस्तों के बिन नही रहता हैं,
मेरे उड़ान में मेरे दोस्त मेरे साथ उड़े हैं।
आस है हम सदैव उड़ान भरे एक साथ,
हरदम दोस्त के साथ जीने कि आस हैं।
शरारत के लिए दिल मचल सचल गया हैं,
दो पल जीने की आस दोस्तों के साथ हैं।
अपने - अपने मंजिल के रुठ मोड़ लिए हैं,
राह देखता हु पुराने दोस्त एक बार मिले।
बड़ी प्यारी दोस्ती साथ-साथ निभाये हैं,
एक पल मेरे दोस्त फिर मेरे से मिल जाये।
हमारी दोस्ती की दास्ताँ ही कुछ और हैं,
पलभर साथ-साथ जो दिल मिले गए हैं।
दो पल कैसे बीत जाते है दोस्तों के पास,
ना रात का आस होता है ना हि दिन का।
हमसफ़र नही दोस्त की दास्ताँ होता है,
आपस में मिल के बैठने का दिल करता है।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें