Hindi

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

संयोग

संयोग!!

रंग रूप का भेद नही
मन में मैला मोल नही
कोखनी शब्द निजात है
निस्वर्थ ही सेवा धर्म है
आभार!!
चार लोग साथ आये
कड़वाहट को दूर भगाये
आये हम सब एक
रानी राजा की कहानी नही
बात है संयोग कि
है मातृभूमि का कर्ज
अदा करने का!!
मन मे ठाना है
निश्चय ही प्राण चले जाये
मौत का संयोग नही होगा
करते है अभिमान
भारतीय होना का
स्वभिमान अधिकार
है नाता एकता का
अन्नदाता का कर्ज
अदा करना है
माटी का मोल
संयोग है!!
जन्म लिए है
कृषि प्रधान देश में
यही हमारा गौरव है
मानवता सर्वाधिक
संचार होता है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर कवर्धा छत्तीसगढ़

बुधवार, 5 जुलाई 2017

अफ़सोस!!

अफसोस..!!

बड़ो काआशीर्वाद
सब चाहते है
पैर छूना जानते है
कंधे का बोझ नही
उम्र गुजर जाते है
पैरो में छाले पड़ जाते है
मगर बच्चे को
दिखता नही है
तमाम सीढ़ी बनाये
एक बिस्तर नही बना सके
भूखे रहने नही दिए
चाहते तो तिजोरी भरे रहते
लेकिन खाली कर दिए
तुम्हारे सपनो के लिए
अंतिम दौर में है
कंधे का सहारा नही
लाठी है पकड़ाने वाले दूर
जींद हु मगर
अफ़सोस!!
मेरे पैरों का सहारा नही।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"