बचपन
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
याद है वह बचपन की नादानी कागज का जहाज बनाते थे
आपस में हम सब दोस्त मिलकर कागज का जहाज चलते थे
ना फ्यूचर की जीवन पड़ी थी ना किसी गम के साथ होने का
हमे तो अपने सौख की पड़ी थी मस्ती करते डांस करते थे
उन दिनों बादल गरजता था तो कान को हाथ से बंद कर लेते थे
जैसे ही पानी गिरता था पानी में भीगने को भागने लगते थे
दोस्तों के साथ दिनभर मस्ती करते थे गप्पे लड़ाते रहते थे
स्कूल जाते तो सबका होमवर्क ना करने का बहाना एक होता था
टीचर से पकड़ा जाते थे फिर दूसरे दिन होमवर्क करने का प्रॉमिस करते
मीना बाजार लगता था तो हवाई झूले में बैठाने का जिद्द करते
घर में बैठ स्कूल ना जाने का लाखो बहाना ढूढ़ते फिरते थे
बचपन में हर पल मौज मस्ती करते फिरते थे।।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
Hindi
गुरुवार, 23 जून 2016
बचपन
बुधवार, 22 जून 2016
दो वक्त की रोटी
दो वक्त की रोटी
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
कैसे कहु कैसे बंय करू
मेरे दिल की दर्द की तनहाई को
कैसे कहु दू मेरे दिल के अरमान को
रुक गये मेरे धड़कन
उन नदानों को सड़क पर चलते देख
कैसे कह दू दुनिया में गरीबी नही हैं
उन नदानों को देख
जिन्हें स्कूल जाना चाहिए
वह सड़क पर भीख माँग रहे हैं
उन्हें कहा पता था
हम क्या कर रहे हैं
उन्हें तो समाज ने बिगड़ दिया
चन्द पैसे देखकर उनको खरीद लिए
उन गरीब को पता कहा था
हमारा काबिल क्या हैं?
उन्होंने तो दो वक्त की रोटी के लिए किया
दर्द भरी निग़ाहों में जान तो थी
लेकिन क्या करे उनके पास काम नही थे
नन्हे पैरों में चप्पल भी नही थे
सब के पास जाते हैं नंगे पैर
कोई तो भीख देदे
उन्हें कहा पता था
हम अभी स्कूल जाने लायक हैं
वक्त की शिकंज पड़ी थी
मजदुर बने वे लोग गरीबी में पड़े थे।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
सोमवार, 20 जून 2016
दुनिया ला बरबाद करे बर मनखे मन तुले हवय
दुनिया ला बरबाद करे बर मनखे मन तुले हवय
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
का होंगे आज मनखे मन ला दुनिया ला बरबाद करे बर तुले हवय,
दुनिया ला उजाड़े बर पेड़ पौधा ला काटे बर मनखे मन तुले हवय।
पेड़ ही नई होहिय ता शुद्ध-शुद्ध ताजा-ताजा वायु कहा ले पहु,
दुनिया मा जीना हवय ता पड़े पौधा ला कटाव नही ओला उगहु।।
उजड़त हवय जंगल हा जमीन होवत हवय रुखासुखा,
उजड़त हवय जंगल हा पशु पक्षी दुनिया ले जावत हवय।
पानी सुखागे पेड़ झाड़ हा दुःखे बरोबर दिखात हवय,
पर्यावरण ला बरबाद करे बर मनखे मन तुले हवय।।
कबहु-कबहु जंगल मा आगी लगथे,
पुरा पशु-पक्षी मन जल के मर जाथे।
का होंगे मनखे मन ला पेड़ ला कटथे,
ट्रेन दौड़ाय बर जंगल ला उजड़त हे।।
वर्षो बाद जंगल धरती में धस के नवा-नवा कोयला देथे,
कबहु-कबहु प्रकृतिक आपदा ले जंगल ह बचावत हवय।
हर साल नवा-नवा फूल-फल सुन्दर हवा देवत हवय,
तभो मनखे मन दुनिया ला उजड़े बर पेड़ काटत हवय।।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
रविवार, 19 जून 2016
स्कूल में पैरों की तलास
स्कूल में पैरों की तलास
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
कदम डगमगाने लगा हैं
उस नन्हे को स्कूल जाते देख
मेरे आँखों में आश्रु आने लगा हैं
स्कूल की तलास मुझे आज भी हैं....
मेरे पैरों की तलास मुझे अभी भी हैं
स्कूल की यादगार पल मेरे साथ हैं
जुनून जस्बा स्कूल को जीतने का हैं
स्कूल की हर लम्हे मेरे साथ जीवित हैं....
वह पल बहुत खुशियों से भरे पड़े थे
12वी के बाद स्कूल से जुदा हो रहे थे
खुश व दुःख की पता नही आँखे नम था
स्कूल के साथ दिल बेजान होने चला था....
उस नन्हे के चहरे पर स्कूल जाने का तेज है
उनके बेजान से चहरे पर उड़ान की किल्कारी गूँजने वाला हैं
आँखों में ख़ुशी की आश्रु की जलधारा प्रवाह हैं
स्कूल की मैदान में आज भी मेरे पैरों की तलास हैं....
खास वह पल वापस आ जाते
क्लास के लास्ट बेंच में हम बैठ जाते
स्कूल में आवाज हमारे गूँज जाते
सभी मित्र एक साथ मिल जाते
पुरने दिनों को यादो के रूप में समेटते....
टीचर के डाट से बचने के लिए बहाने करते
स्कूल में मित्रो की टिफिन में छीनाझपटी करते
खाली पीरियड में गेम्स गेम्स स्पोर्ट टीचर से करते
मैदान में आपने पैरों की तलास आज भी करते.....
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
मेरे पापा
मेरे पापा
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
मेरे जमीं मेरे आसमाँ मेरे पापा,
मेरे सपने का खयाल रखने वाले
मेरे पापा....
आपके बेगार मेरे जुबान है काले,
दुनिया के नवीं में आपसे सीखे हैं
मेरे पापा....
जब जब आपने मुझे सम्मान दिए
तब तब मैने इतिहास में नाम सुमेरे
मेरे पापा....
कल भी आपसे हैं और आज भी हैं
मेरे जीवन का हर सुगन्ध पहचान
मेरे पापा....
मेरे लिए आप हो चाँद से प्यारे
मेरे जमीं मेरे आसमां मेरे पापा
मेरे पापा....
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
सोमवार, 13 जून 2016
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दव
बेटी ल शिक्षा अउ संस्कार दव
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
रामनगर कवर्धा
8085686829
स्कूल हवय तीरे तीर मा गुरूजी हवय सबे जगहा ,
स्कूल के आदि है सबे मनखे मन के गोठ ले पगहा ।
नरक तो भगवान मेरान होथे कहते हवय मनखे मन ,
बिटिया के नरक तो बिन पढ़ई बिहाव से होत हवय ।।
बेटियां की जिन्दगी गुजरत हवय बड़े दुःख अउ संघर्ष मा ,
ना तो स्कूल जाये बर बोलते कोई ना ही संस्कार देथे ।
बेटी के उमर होते 18साल तहले स्कूल नाही भेजता हवय ,
बड़के मन ओला कुछु सीखे के बेरा मा कर देथे ओखर बिहाव ।।
बेटी में जतका संस्कार होथे ओहा पूरा गढ़ते हावय ,
नही ता आज अबड़ मनखे मन बिन संस्कार के होतीन ।
दूत बनके आथे बेटी मन हा दुनिया ला गढ़े बर ,
बिटिया के बिन तो दुनिया अजनबी हवय बरोबर हे।।
बेटी मनके पढ़ाई मा जोर देना हवय ,
तभे दुनिया मा पढ़ाई बरोबर रहाई ।
संस्कार ले घर परिवार सुघ्घर बसथे ,
दुनिया मा संस्कार अउ पढ़ाई बने हे ।।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
"बेटी की भविष्य अब हमारे पक्ष से बढ़कर हैं अनमोल हीरे की तरह बेटी की पढ़ाई और संस्कार बेटी की गरिमा बनाये रखते हैं। संस्कार की सबसे बड़ी जीत की पैगाम हैं बेटी की मान सम्मान बनाये रखना और बेटी को हमेशा समाज के हित को ध्यान में रखकर ऊँचे बुलंदियो शिखर का रास्ते उड़ान भरना चाहिए।"
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
"एक बेटी शिक्षित तो समाज शिक्षित हो जाता हैं और एक बेटा शिक्षित तो सिर्फ वहि बस शिक्षित समाज शिक्षित होता नही है।"
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
रामनगर कवर्धा
8085686829
बुधवार, 8 जून 2016
सफलता एक सफलता की जान हैं।
सफलता एक सफलता की जान हैं।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
सफलता वास्तव में वही हैं, जो दुनिया अपने दम पर जीतता हैं सारी मुसिबत पैरो के कदमो के नीचे छोड़ कर, आपने सतत् मार्ग पर आँधी की तरह प्राय चलते जाते हैं।
सफल व्यक्ति हमेशा जीवन में आगे बढ़ने का सोचता है और मन और शांति से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सतत् कर्म बिन्दु की राह पर निकल पड़ते हैं सफलता दुनिया जीतता हैं।
सफलता का मूलमन्त्र है जुनून ,जस्बा, मेहनत, लग्न, साहस और कर्म इत्यादि के माध्यम से एक बाँदा अपने लक्ष्य को सफल कर पाते हैं और दुनिया में आपने महानता का पर्चम फैला देते हैं।
सफलता एक इंसान की लक्ष्य होता हैं वह हमेशा सफल हो ,दुनिया में कभी भी उन्हें हार का सामना करना ना पड़े । वास्तव में वही बाँदा दुनिया में सफल होते है जिन्होंने कर्म हमेशा किया होता हैं।
दुनिया में सफल बाँदा वही होता है जो हार कर भी अपना टैलेंट नही खोता हैं परन्तु सब भुलाकर दुनिया को जीतने के लिए संघर्ष के मार्ग में चल पड़ते हैं और अपने लक्ष्य को असानी से प्राप्त करते हैं।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
एक व्यंग्य:-जाति से मैं इंसान और दुनिया के रचियता भगवान का सवांद।
एक व्यंग्य:-जाति से मैं इंसान और दुनिया के रचियता भगवान का सवांद।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
धर्म का बोझ दुनिया में मैंने नही परन्तु आप लोगों ने लेकर आये हैं मैंने तो आपको सिर्फ दुनिया में अच्छे कर्म के लिए भेजे थे लेकिन आपने तो पुरी दुनिया उलट पुलट दिये।
नही सरकार हमने तो कुछ भी नही किये आपने तो मूलक मूलक के बीच समुद्र पहाड़ नदी बंधे हैं हमने तो सिर्फ अपना अपना धर्म का प्रचार किये हैं अपने धर्म को बड़ा बताये।
यही तो गलत किये है आप लोगों ने हम तो सभी सेवा प्रदान किये है आपको ,आपने तो धर्म में दुनिया को बाँट दिए हैं ये तो सबसे बड़ी गुनाह हमारे साथ कर दिए ।
करना पड़ा हमारी सामाज दुनिया में खतरे में थी रास्ते नही थे भाई भाई में जाति बाटने के सिवया कुछ चारे नही थे धर्म में नही बाटते तो बड़ी अर्चण आ जाती।
तो क्या अभी काम अर्चण है मैंने तो कितना अच्छा प्राकृतिक AC फ्रिज़ दिए थे फिर भी आपलोगों ने प्रदुषण करने में तुले और दुनिया को पूरी तरह तोड़ने लगे।
जनसंख्या बड़ी तो सभी चीज़े के जरूरत बड़ी और जरूरत बड़ी तो प्रदुषण हुआ इसमें हम क्या कर सकते हैं ये तो सभी की सच्चाई हैं इसमें कुछ नही किया जा सकता था।
राजयोगी बने परमात्मा को हमेशा याद कीजिए हमेशा सत्य वचन बोलिए किसी के दिल को ठेष ना लगे ऐसे शब्दों का हमेशा अपने जीवन में प्रयोग कीजिए प्रकृति की परवाह कीजिए और सुन्दर बने।
ओम शांति!!