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बुधवार, 17 जून 2020

सरहद की लकीरें

सरहद की लकीरें 

दो मुल्क के बीच 
इंसान रहते है,
न जाने कब तक
वे निर्दोष रहते है,
नक्शा,
कब देश बन जाता है
दो देश के बीच 
लकीरें खींच जाता है,
और बन जाती है सरहद, 
यू आसान नही होता
हिंसा करना,
सरहद
खेत की मेड़ की तरह है,
कुछ हो जाने पर किसान,
बातों बात में लड़ लेता है
लेकिन हत्या नही होता, 
सरहद की सीमा कुछ ऐसी है
दोनों तरफ सैनिक है, 
नापाक हरकत कभी सहा नही, 
भारत विशालकाय देश है
समृद्ध और न्यायप्रिय है, 
कूटनीति को समझ 
जब कोई वार करता है, 
भारत चुप होकर बैठता नही
एक के बदले कई ले आते है,
सरहद की दीवार
कितनी भी मजबूत हो,
टकराव तो होता है
समय ने लकीरें खींची 
हिंसा नही रुकी,
चारफिट के लोग क्या टिकेंगे 
भारतीय सेना पर गर्व है
कायरो को धूल चटाई,
हिंदी चीनी भाई भाई नारा बस है
असल में चीन का चेहरा कुछ और
सरहद की लकीरें,
बहुत कुछ कहती है
दोनों तरफ इंसान रहते है,
इधर भी वही हवा उधर भी, 
प्रकृति भी समान है, 
बस फर्क है सोच का, 
हम अहिंसा चाहते है
वो हिंसा, 
समय का फेर है
चक्रव्यूह में फंसने वाला नही, 
सेना सम्पूर्ण तरह से सशक्त है, 
सरहद की लकीरें 
खींचा क्यो गया? 

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा" 

रविवार, 26 अप्रैल 2020

कितने घर

कितने घर

न जाने वह
कौन सी रात होती है?
घर का दो हिस्सा,
खुद-ब-खुद अलग हो जाती है।
यह मुल्क नही घर है
जहाँ संस्कार मिले,
मुल्क से संस्कृत मिली,
सभ्य समाज मिले।
एकता ,संघटन,रिश्ता,
प्रेम,अपनत्व की बात करते है
कहाँ खो जाती है
संवेदना और मन की भाव,
तोड़ने वाले हजार,
और जोड़ने वाले?
वो दरवाजा और आँगन
बीच में एक दीवार
रह जाती है।
न जाने वह कौन सी बात है
फिर से इतिहास दोहराती है।
नेकी का हाथ थम जाये,
और घर,
दीवार में सिमट जाती है।
वो पहिया भी थम गया
वो प्रेम न जाने कहाँ खो गई?
वर्षो पहले सयुंक्त दिखाई देती थी
आज वही
एक परिवार सिमट गई।
दीवार बन जाता है,
फिर भी आँगन
मायूस होकर क्या बोले?
उसके जहन में एक बात रह जाती है
कितने घर और बनेगा।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
मो.8085686829