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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

प्रयास

प्रयास...

कभी न ठहरना
वक़्त बदल रहा है
तब्दीली के लिए
हमेशा मेहनत करना
अपने आप को मजबूत करना
संघर्ष से सफलता तक
अपने को जिंदा रखना
स्वभिमान को जिंदा रखना
एक नई सुबह की किरण
सकारात्मक सोच के साथ
इम्तिहान लेती है
उसे पार करके
अपने संघर्ष को
जीत में तब्दील करना
अपने संवेदना को जिंदा रखना
दूसरे की जीत की दुआ करना
दिल से प्रयास करना
कभी हार नही मानना
अपने को ढाल लेना
सभी मुसीबत से निकलना
और दूसरे को खुश करना
स्वंतत्रता का आभास कराना
प्रेरणा की दीप जलना
सत्य के साथ आगे बढ़ना
कभी न रुकना
महानता नही
उसे संघर्ष दिखता है
जो हमेशा बदलाव लेकर आता है
जो हमें जीने की कला
और सम्मान की भावना
सीख दे जाती है
मुड़कर न देखना
हार कर जीतने के लिए प्रयास
हमे तब्दीली कि राह पर
अनूठा रास्ता तय कराती है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

दीवली विशेष

दीवाली विशेष..

एक दीवाली से क्या
जज्बात बदल रहे है
हालात बदल रहे है
पहले कुछ और था
आज कुछ और है
आगे कुछ और होगा
जवान के नाम एक दीवाली
एक दीपक प्रभु के नाम
स्वतंत्र के लिए खड़े
एक दीपक जवानों के नाम
दीपदान का पर्व उनके नाम
भारत माँ के वीर सपूतों के नाम
किसान के नाम एक दीपक
जयकारा जवानों के नाम
समझे आज दीपदान का पर्व
राम जी के याद में
कितने घर उजाला हो गया
वर्षो से जो परम्परा है
आज भी बरकरार है
खुशी हर्षोल्लास का पर्व
अद्भुत रंग लेकर आता है
दीपक चारों ओर चमक लाता है
सद्भावना व भाईचारे का पर्व
एकता की मिशाल पेश करता है
धन धान्य से परिपूर्ण धनतेरस
मुस्कुराहट से परिपूर्ण रूपचौदस
खिलखिलाहट से परिपूर्ण दीवाली
गौ माता से परिपूर्ण गोवर्द्धन पूजा
भाई बहन से परिपूर्ण भाईदूज।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"




मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

वक्त का खेल...

वक्त का खेल

आँखों मे
सपने हजार
मंजिल तक
जाने के रास्ते हजार
किधर से जाये
भेड़चाल या खुद की
यह विचार करना
अपने आप मे
अपनी कमी खोजना
जीत की निशानी
वक्त का इम्तिहान
खास मकसद के लिए
अपने को दूसरे के
इक्षा में ढालना
जीवन का दस्तूर है
हमे नया मोड़
और अलग सोच
मानवीय और जीत
आपस मे जकड़ा हो
इस पर विचार करके
तहजीब साथ रखके
संघर्ष करना
जीत तक लगे रहना
हारना और
बहुत कुछ सीखना
यही दस्तूर है
जो हमारे विचारशील को
मजबूत करता है
वक्त के साथ
बदलाव लाना
तजुर्बे को महत्व
देना सिखाती है
अहिंसा के पथ में
सत्य तक संघर्ष लिए हुए
दृण संकल्प से
अपनी खेल का
प्रदर्शन करना।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19वर्ष 'विद्यार्थी'
साइंस कॉलेज दुर्ग में अध्ययनरत
रामनगर, कवर्धा, छत्तीसगढ़



शनिवार, 8 सितंबर 2018

कितने घर

कितने घर

न जाने वह
कौन सी रात होती है?
घर का दो हिस्सा,
खुद-ब-खुद अलग हो जाती है।
यह मुल्क नही घर है
जहाँ संस्कार मिले,
मुल्क से संस्कृत मिली,
सभ्य समाज मिले।
एकता ,संघटन,रिश्ता,
प्रेम,अपनत्व की बात करते है
कहाँ खो जाती है
संवेदना और मन की भाव,
तोड़ने वाले हजार,
और जोड़ने वाले?
वो दरवाजा और आँगन
बीच में एक दीवार
रह जाती है।
न जाने वह कौन सी बात है
फिर से इतिहास दोहराती है।
नेकी का हाथ थम जाये,
और घर,
दीवार में सिमट जाती है।
वो पहिया भी थम गया
वो प्रेम न जाने कहाँ खो गई?
वर्षो पहले सयुंक्त दिखाई देती थी
आज वही
एक परिवार सिमट गई।
दीवार बन जाता है,
फिर भी आँगन
मायूस होकर क्या बोले?
उसके जहन में एक बात रह जाती है
कितने घर और बनेगा।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
मो.8085686829

रविवार, 19 अगस्त 2018

बचाव दल

बचाव दल

आपदा घर में
टूट पड़ी अचानक
वर्षा तेज होने लगी
उम्मीद नही था
बैठे थे घर पर
अचानक रोड नदी में
तब्दील हो गया
देखते ही देखते
पानी घर मे घुसने लगे
तेज बहाव
न थमने वाली बारिश
आसमान से टूट पड़ा
उम्मीद तो बहुत थी
घर का छत ढह नही गया
आसमान की पानी को
छत रोक लिया
लेकिन रोड का पानी
बांध का पानी
इसतरह बढ़ा बाढ़ आ गई
सब तरफ जिधर नजर घुमाये
पानी ही पानी नजर आ रही है
इंतजार है मसीहा का
कोई आये और बचा ले
उस जगह ले जाये
जहाँ महफूज रह सके
आसमान का कहर
इस तरह बरपा
न चाहते हुए भी
घर छोड़
राहत कैम्प में है
नजर है मसीहा की ओर
जो आये और सहायता कर सके
इंतजार है उस वक़्त का
बीच मे दरार हुए
भाई का हाथ थाम ले
और कह दे मैं खड़ा हूँ
केरल की आवाम को जरूरत है
एक ऐसा मसीहा
जो वहाँ मेहनत कर रहे है
बचाव दल अधिकारियों को प्रणाम
उन्हें उनके हालात में न छोड़
मसीहा बन गये।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

इंतजार है

इंतजार है

आसमान की ओर नजर
खेत में फसल है
पानी के इंतजार में
अन्नदाता देख रहा
पानी बरसने का इंतजार
खत्म नही हो रहा
फसल लहलहाती नजर आये
पहले पानी तो गिरे
इंतजार है उस समय का
जब धरती आसमान
क्षितिज में मिले
वर्षा ऋतु बीत रही है
पानी का पता नही
चारों तरफ पानी की
हाहाकार मची हुई है
नजर किधर घुमाये
अफसोस और इंतजार
आखिर कब तक
समय बीत रहा है
मिट्टी से जो खुश्बू आती
न जाने वह वक़्त कब आये
फसल जगे या मार जाये
इंतजार पानी का है
भूख तो सभी को है
न जाने कब अन्न खेत से आये
अन्नदाता भी खुश हो जाये
इंतजार है उस वर्षा का
जो फसल के लिये अमृत है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"


शुक्रवार, 29 जून 2018

संघर्ष

संघर्ष

हार कर जितना
मन को एकाग्र
सत्य के पथ में
हमेशा अग्रसर
स्वयं को बदल
हमेशा साथ चलना
एक ज्वाला की तरह
हर वक़्त खड़े होना
आंधी में चटटान
गर्म में गलेशियर
ठंड में मोम
फूल की तरह खुश्बू
लोहे की तरह तपना
नित्य कर्तव्य पथ में
सदैव अग्रसर बढ़ना
अनेकता में एकता
जिंदगी में सत्य
हरतरफ अनमोल
स्वतंत्र होकर
लक्ष्य तक पहुँचना
गिरकर चढ़ना
हार को जीत में
तब्दील करना
गिरकर खड़ा होना
लक्ष्य तक डटे रहना
सरलता झलकती हुई
नित्य कर्म करना
भय स्वर्थ बिना
लय लिए
जीत के लिए आगे बढ़ना।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़



शनिवार, 23 जून 2018

बिक गया

बिक गया..

बाजार देखा
व्यपारियो का
अनाज बिक गया
खेत देखा
तो किसान?
मुरझाकर
मेड़ में पड़ा है।

लहलहाती फसलें
सौंधी सौंधी महक
चारो दिशा में
बिखर रही है
फिर भी
आखिर किसान क्यो?
सिकुड़कर सो गया

घर मे छत न हो
पर आस
और आँख
विशाल आकाश की ओर
टकटकी लागये हुए
विश्व को
जीवनदान दे रहे है।

कभी अपने लिये नही
कभी स्वार्थ नही
विश्व के लिये
अनाज उपजाये
निरन्तर सेवा किये
विकास में
हाथ किसान का।

भूख में किसान का
हड्डियां सिकुड़ गया
राह न बदलकर
हमेशा देश हित
विश्व हित को ध्यान रखते
किसान तो है
अनाज बिक गया।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़
मो.-8085686829




शनिवार, 28 अप्रैल 2018

मुसाफिर

मुसाफिर

चलते चले
हम एक ओर
राह न छोड़े कभी
चलते चले
मंजिल की ओर
अपनी सोच को
कभी मरने नही दिये
हमेशा सकारात्मक
सोच लिए बढ़ते चले।

जिंदगी में
कभी हारे नही
एक सोच लिए
आगे बढ़े
अपने कर्मो को
हमेशा ध्यान में रखे
ज्ञान के मार्ग में
राहगीर की तरह
बढ़ते चले।

हाथों को हाथ लिए
आगे बढ़ते चले
जीवन मे आगे बढ़ते गए
सत्य के राह में
निरन्तर करते रहे
समाज मे नई दिशा
नई सोच लिए बढ़े चले
कर्तव्य पथ में
आगे बढ़ते रहे।

अहिंसा के पथ में
चलते रहे
आजादी के परवाने
संघर्ष लिए
अंतिम समय तक लड़े
तब जाके आजादी मिली
मुसाफिर की तरह
बढ़ते रहे
बिना नकारात्मक सोच से
जीत तक लड़े।

समय के साथ रिश्ता
बनता गया
देश की सेवा के लिए
युवाओ को आगे आना पड़ा
अब वक्त है
एकजुट होने का
एक नया भारत
विकास गढ़ने का
विश्व गुरु और शीर्ष में
लेकर जाने का।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19 वर्ष 'बीएससी प्रथम वर्ष'
रामनगर,कवर्धा, छत्तीसगढ़
मो.-8085686829

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

उम्र ही तो है...

उम्र ही तो है...

जन्म हुआ
स्वर्णिम समय था
नन्हे किलकारी से
बचपन आई
कुछ वर्ष का था मैं
बड़ी शरारत करता था
यादों का बौछार लिये
उम्र ही तो है...

उस दौर से गुजरा
बचपन की याद को
अपने बांहों में समेटे
सादगी का अहसास
करते हुये बड़ा हुआ
युवा दौर से गुजरा
पढ़ लिख कामयाब बना
उम्र ही तो है....

परिवर्तन नियम है
आंखों में संजोय
युवा से जवान में
तब्दील हुआ
एक नई उमंग के साथ
दो रोटी बटोरे
आँखों मे चमक आई
सफलता मिला
उम्र ही तो है...

दिन-ब-दिन
वर्ष बितता गया
जीवन का दस्तूर है
खुशी की लहर
दौड़ने लगी
मानो चारों ओर
स्वपन साकार हुए
उम्र ही तो है....

समय व्यतीत होते गया
सभी दौर से गुजर गया
एक दौर बचा था
अपने बच्चो
कामयाब देख
उनके बच्चो को
गोद मे उठाने का
वह भी पूरा हुआ
उम्र ही तो है...

अंत मे वह समय आया
जब किसी
सहारे की जरूरत पड़ी
अपने बेटे को करीब पाया
साल बीतता गया
जन्म हुआ है
तो अंतिम दौर भी आया
उम्र ही तो है...

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18 वर्ष 'बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र'
रामनगर,कवर्धा, छत्तीसगढ़
वर्तमान साइंस कॉलेज दुर्ग में अध्ययनरत
मो.-8085686829