बचाव दल
आपदा घर में
टूट पड़ी अचानक
वर्षा तेज होने लगी
उम्मीद नही था
बैठे थे घर पर
अचानक रोड नदी में
तब्दील हो गया
देखते ही देखते
पानी घर मे घुसने लगे
तेज बहाव
न थमने वाली बारिश
आसमान से टूट पड़ा
उम्मीद तो बहुत थी
घर का छत ढह नही गया
आसमान की पानी को
छत रोक लिया
लेकिन रोड का पानी
बांध का पानी
इसतरह बढ़ा बाढ़ आ गई
सब तरफ जिधर नजर घुमाये
पानी ही पानी नजर आ रही है
इंतजार है मसीहा का
कोई आये और बचा ले
उस जगह ले जाये
जहाँ महफूज रह सके
आसमान का कहर
इस तरह बरपा
न चाहते हुए भी
घर छोड़
राहत कैम्प में है
नजर है मसीहा की ओर
जो आये और सहायता कर सके
इंतजार है उस वक़्त का
बीच मे दरार हुए
भाई का हाथ थाम ले
और कह दे मैं खड़ा हूँ
केरल की आवाम को जरूरत है
एक ऐसा मसीहा
जो वहाँ मेहनत कर रहे है
बचाव दल अधिकारियों को प्रणाम
उन्हें उनके हालात में न छोड़
मसीहा बन गये।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"