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रविवार, 19 अगस्त 2018

बचाव दल

बचाव दल

आपदा घर में
टूट पड़ी अचानक
वर्षा तेज होने लगी
उम्मीद नही था
बैठे थे घर पर
अचानक रोड नदी में
तब्दील हो गया
देखते ही देखते
पानी घर मे घुसने लगे
तेज बहाव
न थमने वाली बारिश
आसमान से टूट पड़ा
उम्मीद तो बहुत थी
घर का छत ढह नही गया
आसमान की पानी को
छत रोक लिया
लेकिन रोड का पानी
बांध का पानी
इसतरह बढ़ा बाढ़ आ गई
सब तरफ जिधर नजर घुमाये
पानी ही पानी नजर आ रही है
इंतजार है मसीहा का
कोई आये और बचा ले
उस जगह ले जाये
जहाँ महफूज रह सके
आसमान का कहर
इस तरह बरपा
न चाहते हुए भी
घर छोड़
राहत कैम्प में है
नजर है मसीहा की ओर
जो आये और सहायता कर सके
इंतजार है उस वक़्त का
बीच मे दरार हुए
भाई का हाथ थाम ले
और कह दे मैं खड़ा हूँ
केरल की आवाम को जरूरत है
एक ऐसा मसीहा
जो वहाँ मेहनत कर रहे है
बचाव दल अधिकारियों को प्रणाम
उन्हें उनके हालात में न छोड़
मसीहा बन गये।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

इंतजार है

इंतजार है

आसमान की ओर नजर
खेत में फसल है
पानी के इंतजार में
अन्नदाता देख रहा
पानी बरसने का इंतजार
खत्म नही हो रहा
फसल लहलहाती नजर आये
पहले पानी तो गिरे
इंतजार है उस समय का
जब धरती आसमान
क्षितिज में मिले
वर्षा ऋतु बीत रही है
पानी का पता नही
चारों तरफ पानी की
हाहाकार मची हुई है
नजर किधर घुमाये
अफसोस और इंतजार
आखिर कब तक
समय बीत रहा है
मिट्टी से जो खुश्बू आती
न जाने वह वक़्त कब आये
फसल जगे या मार जाये
इंतजार पानी का है
भूख तो सभी को है
न जाने कब अन्न खेत से आये
अन्नदाता भी खुश हो जाये
इंतजार है उस वर्षा का
जो फसल के लिये अमृत है।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"