मुसाफिर
चलते चले
हम एक ओर
राह न छोड़े कभी
चलते चले
मंजिल की ओर
अपनी सोच को
कभी मरने नही दिये
हमेशा सकारात्मक
सोच लिए बढ़ते चले।
जिंदगी में
कभी हारे नही
एक सोच लिए
आगे बढ़े
अपने कर्मो को
हमेशा ध्यान में रखे
ज्ञान के मार्ग में
राहगीर की तरह
बढ़ते चले।
हाथों को हाथ लिए
आगे बढ़ते चले
जीवन मे आगे बढ़ते गए
सत्य के राह में
निरन्तर करते रहे
समाज मे नई दिशा
नई सोच लिए बढ़े चले
कर्तव्य पथ में
आगे बढ़ते रहे।
अहिंसा के पथ में
चलते रहे
आजादी के परवाने
संघर्ष लिए
अंतिम समय तक लड़े
तब जाके आजादी मिली
मुसाफिर की तरह
बढ़ते रहे
बिना नकारात्मक सोच से
जीत तक लड़े।
समय के साथ रिश्ता
बनता गया
देश की सेवा के लिए
युवाओ को आगे आना पड़ा
अब वक्त है
एकजुट होने का
एक नया भारत
विकास गढ़ने का
विश्व गुरु और शीर्ष में
लेकर जाने का।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-19 वर्ष 'बीएससी प्रथम वर्ष'
रामनगर,कवर्धा, छत्तीसगढ़
मो.-8085686829