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शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

वेदना का घड़ी

एक छोटे से बच्चे का प्रश्न अपने माँ से

ये कैसी वेदना हैं और घड़ी है,
मेरे पापा अबकी बार नही आये।

आपके आँखो में आँसू हैं,
बाल भी बिखरे पड़े हैं
पैरों की पायल की खनक सुनी हैं
माथे में बिन्दिया  नही लगाई हो।

पुछते पुछते बेटा गया आँगन में
तब जुड़ने लगी थी लकड़िया
लाश आया ही था की घर में
गाँव के सब लोग मौजुद थे।

कैसे कहता वह बेटा अब पिता नही हैं?
माँ के आँखो का काजल बिखर गया था
रो रोके हाल था बेहाल
सरहद में कटी थी उनकी अंतिम पल।।।

वो बच्चा अंजान था कहाँ है पापा?
लाश रखी थी आँगन में
खामोशियां था उनके पिता के आने से
आये भी तो तिरंगा में
रंग और रुप का पता नही।।

न हिन्दू था न मुस्लिम
था वह इंसान
घर छोड़ गया था सरहद में
आये थे सुख शांति के लिए।।।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17 वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

दीपावली पर विशेष

दीपावली पर विशेष...

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

सुर्यास्त होने लगा
घर में खुशिया छाने लगा
ये पाँच दिन का पर्व चालु होने लगा
आकाश में जुगनु चमकने लगा
चारों दिशा में दीपक जलने लगा.....

तारों से सजी घर हो
हीरे की तरह चमक हो
जीवन में सादगी का एहसास हो
सुख शांति हमेशा साथ हो
मंगलबेला का आगमन हो.....

महक रहे थे फूल की सुगंध
आँगन में रँगोली सजी थी
घर में खुशियों के मिठाई बनी थी
पाँच दिन हर्ष से भरे पड़े थे
राहे कम नही थे पल पल ख़ुशी थी.....

संजोग ऐसा पड़ा चार चाँद दिखा
धीरे धीरे हिम्मत और लग्न से किया कर्म
जीत मेरे दरवाजा खटखटाने लगा
दीपक का उजाला छाने लगा
थोड़ी से कोशिश जीत दिला दिया.....

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085688629

पापा क्यों न आये अबकी बार

पापा क्यों न आये अबकी बार...

है धर्म मेरा इंसानियत
मेरा ईमान है भारत धर्म हैं मानवता
मेरा जाति है प्यार का दूत हैं एकता का
मेरे पापा है सरहद में....

सिंचिन में है बर्फबारी
चुना में है रास्ते दर्दनाक चट्टान का
एक तरफ चीन है एक तरफ पाक
मेरे पापा क्यों न अबकी बार....

मेरे घर में हैं खामोसिया अबकी बार
मेरे घर में है आज मेरे पापा की विदाई
दीपावली में न आये मेरे पापा अबकी बार
सरहद में मना लिए दीपावली होली एक साथ..

पाक है आतंकी देश भारत का नाश
फौजी मर रहे है भारत के जासुसी रिश्ते से
राजनीति क्यों खामोश बैठी हैं?
फिल्मीदुनिया में घुस बैठी है पाक भारत में...

सब क्यों सहे एक फौजी?
सरकार क्या कर रही है उनके लिए?
एक दीवाली मनाते है घर में बैठ के
सरहद में क्या गुजर रही है वे जानते हैं....

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

हाईकू ए अंजान

हाईकू-ए-अंजान

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
समय 5:54 पीएम 16 अक्टूबर 2016..

साथ तुम हो।
मेरे जिंदगी साथ।
तेरे बिन मैं।।

        तेरे लिए मैं।
        रोया था पल-पल।
        सांस तुम हो।।

मेरे जिन्दगी।
तुम साथ हमेशा।
रहना पड़ा।

        तेरे लिए मैं।
        पल पल जगा था।
        रोया कल था।

सपना तुम।
अपना साथ अब।
तेरे बिन मैं।।

        कोई अपना।
        अधुरे हैं सपना।
        मेरे बिन तु।।

रहते साथ।
बात अन्जान लगे।
मरके साथ।।

        प्यास लगे तो।
        गले से लगा लूँगा।
        तेरे बिन मैं।।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829


शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

अन्न बचाओ.....

अन्न बचाओ देश का सम्मान बढ़ाओ

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

था मैं अकेला
बचपन का बोझ था
खाने का मगरुर था
काट रहे थे दिन
अन्न का किलत था
बर्बादी का मंजरा था।

था मैं अकेले
आजदी के दौड़ में
अकाल पड़ा था
खाने के लाले पड़े
पशु खाते थे जिसे
मेरे संतान खाये।

अन्न 'अमित' जीवन है
व्यर्थ न फेके इसे
सामना करना है अकाल से
जर्जर करो अन्न को
क्रोध छोड़ो जीवन में
शांति से रहो संसार में।

अजीब मौहोल है
इस सादगी के एहेसास में
अन्न को बर्बाद नही
सरलता से सहेजे इसे
आगे बढ़ना हैं
मातृभूमि से प्यार करे।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर ,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

तुम साथ हो....

ये दिल तेरे इश्क़ में गुनाहा किया

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

ज़रा - ज़रा में इश्क़ है
तुम दिल को भीगा दो
तुम दिल को मिला लो
तेरे गम में आज रोना हैं।

     तनहाई कटे दिन रात से
     तेरे इश्क़ में बेगाना हुआ
     दिल तेरे लिए मर गया
     दीवान-ए-दीवान  हुआ।

रातों में जगते थे हम
तेरे इश्क़ में तनहा हुआ
रात दिन का पता नही
तेरे इश्क़ में दीवान हुआ।

     साँसों में बसी हो तुम
     मेरे आँखों में अब तुम
     हर घड़ी हो तुम साथ
     इश्क़ हैं मैदाने-ए-जंग।

रुख्सत न होना तुम
मेरे दिल में फिजाओं में
तेरे लिए मैंने रोया
तेरे बिन मेनु न जीना।

     अल्फ़ाज बना लो तुम
     तेरे इश्क़ में रोया हैं
     तुम साथ न होते हो
     मेरा दिल बेगाना लगता हैं।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर, कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

खो न जाता इसकदर मैं तुम साथ न होते।

खो जाऊँगा पंछी की तरह मुक्त आसमान में

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

अजीब प्यार,
तुम खो गए अभी,
दिल माना हैं।

     रास्ते बन्द हैं,
     आने का मन अभी,
     तेरे फिजाओं।

  सब झुठे हैं;
  झुठे सब याद के,
  वादे याद हैं।

   खो न गए हो,
   दिल बोझ लगा हैं,
   वादे समेटे।

खो न जाता मैं,
तुम साथ न होते,
रोते नही हैं।

झुठे निकले,
कोई गल नही हैं,
याद साथ हैं।

  सितारे बने,
  इश्क़ तेरे खातिर,
  तेरे बिन मैं।

सोच न था मैं,
खो जायेंगे न हम,
रात जगा मैं।

  प्यास नही हैं,
  जी कर के करे क्या?
  खो गए आज।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829


    
  
        

सोमवार, 3 अक्टूबर 2016

हैसियत दिखा दीजिए चाइना का....

चाइना का समान उपयोग में न लाये तथा लाइट का उपयोग कम से कम करे ताकि किसी दुसरे देश से विद्युत लेने कि जरूरत न पड़े। एक पहल एक सोच भारतीय होने का दावा कीजिए एवम् देश के वर्तमान स्थिति के साथ खड़ा होना सीखे। इसी पर अधारित मेरी(अमित चन्द्रवंशी"सुपा") छोटी सी कविता :-

रियासत गजब का था भारत में,
आधे अंग्रेजो ने लुटा आधे चीनी ने
भारत को इसकदर लुटे लिए हैं,
यहाँ आज भी गरीबी से सामना करते हैं।

मैत्री बहुत देशों से कि भारत ने
फिर भी आज देखने को मिल रहा है
रियासत तो कोहिनुर का था,
आज बड़ी संघर्ष से गुजर रहे हैं।

गोल्डन इंडिया चाइना इंडिया हो गया
चीनी ने दोस्ती नही दुश्मनी से देखा है
आज जो भी देखो चाइना है चाइना,
आखिर चाइना का माल टिकता नही हैं।

पानी रोक दिए नाचीज सी हरकत कर
नासिफ सी हरकत कर अन्न रोक देते हैं
कदम बढ़ाये चीनी समान बहिष्कार कर,
उन्हें भी दिखा दे 'अनेकता में एकता का।'

अंजाम आयेगा चाइना नही बच पायेगा,
भुख से मर जायेगा भिखारी बन जायेगा
पाक खरीदेगा समान चाइना बन जायेगा,
आखिर अंत में दोनों गरीब बन जायेंगे।

औक़ात दिखा दो उस नाचीज चीन का,
इस दीपावली में रंगीन लाइट न जलाओ
अब पहल कीजिए चाइना पटाखे रुख्सत का,
अब भुख से मरेगा चाइना गरीब बनकर।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर, कवर्धा जिला- कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829



पाक तेरा वर्तमान स्वरूप तो देख

पाक तेरा खाक भी नही बचेगा।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

जीना भी जरूरी था,
                       जुदा होना भी जरूरी था।
मर कर भी अमर था,
                       राह चलते चले जाना था।।

खुद में खुद को गिराकर,
                          अपनों में गिर गए हैं।
ऐ पाक उठ भी न पाता,
                        आजादी में साथ न होते।

हैसियत नही हैं कुछ भी,
                         बात बड़ी-बड़ी करता हैं।
ऐसे बेटी से डरते हो,
                       बेटी के उन्नति से डरते हो।

नवजवान से हार गए,
                         हमेशा भारत से डरते हो।
बम मत फेको बोलते हो,
                         आग लगाना नही छोड़ते हों।

कायर कि तरह बैठे हो,
                           ख़मोशी देखकर लड़ते हो।
दिन में युद्ध करके देख,
                      तेरा राख तो होगा बचेगा नही।

अपने में नही जी रहा हैं,
                               दुसरे से क्या लड़ेगा?
अभी 20साल पीछे हैं,
                             50साल पीछे हो जायेगा।

अकेले तेरा हिम्मत नही है,
                         पाक है खाक भी नही रहेगा।
लड़कर तो देख भारत से,
           तेरा हस्ती नही बचेगा इतिहास बनेगा।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला- कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829