पापा क्यों न आये अबकी बार...
है धर्म मेरा इंसानियत
मेरा ईमान है भारत धर्म हैं मानवता
मेरा जाति है प्यार का दूत हैं एकता का
मेरे पापा है सरहद में....
सिंचिन में है बर्फबारी
चुना में है रास्ते दर्दनाक चट्टान का
एक तरफ चीन है एक तरफ पाक
मेरे पापा क्यों न अबकी बार....
मेरे घर में हैं खामोसिया अबकी बार
मेरे घर में है आज मेरे पापा की विदाई
दीपावली में न आये मेरे पापा अबकी बार
सरहद में मना लिए दीपावली होली एक साथ..
पाक है आतंकी देश भारत का नाश
फौजी मर रहे है भारत के जासुसी रिश्ते से
राजनीति क्यों खामोश बैठी हैं?
फिल्मीदुनिया में घुस बैठी है पाक भारत में...
सब क्यों सहे एक फौजी?
सरकार क्या कर रही है उनके लिए?
एक दीवाली मनाते है घर में बैठ के
सरहद में क्या गुजर रही है वे जानते हैं....
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें