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शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

अन्न बचाओ.....

अन्न बचाओ देश का सम्मान बढ़ाओ

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

था मैं अकेला
बचपन का बोझ था
खाने का मगरुर था
काट रहे थे दिन
अन्न का किलत था
बर्बादी का मंजरा था।

था मैं अकेले
आजदी के दौड़ में
अकाल पड़ा था
खाने के लाले पड़े
पशु खाते थे जिसे
मेरे संतान खाये।

अन्न 'अमित' जीवन है
व्यर्थ न फेके इसे
सामना करना है अकाल से
जर्जर करो अन्न को
क्रोध छोड़ो जीवन में
शांति से रहो संसार में।

अजीब मौहोल है
इस सादगी के एहेसास में
अन्न को बर्बाद नही
सरलता से सहेजे इसे
आगे बढ़ना हैं
मातृभूमि से प्यार करे।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17साल 'विद्यार्थी'
रामनगर ,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

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