Hindi

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2016

वेदना का घड़ी

एक छोटे से बच्चे का प्रश्न अपने माँ से

ये कैसी वेदना हैं और घड़ी है,
मेरे पापा अबकी बार नही आये।

आपके आँखो में आँसू हैं,
बाल भी बिखरे पड़े हैं
पैरों की पायल की खनक सुनी हैं
माथे में बिन्दिया  नही लगाई हो।

पुछते पुछते बेटा गया आँगन में
तब जुड़ने लगी थी लकड़िया
लाश आया ही था की घर में
गाँव के सब लोग मौजुद थे।

कैसे कहता वह बेटा अब पिता नही हैं?
माँ के आँखो का काजल बिखर गया था
रो रोके हाल था बेहाल
सरहद में कटी थी उनकी अंतिम पल।।।

वो बच्चा अंजान था कहाँ है पापा?
लाश रखी थी आँगन में
खामोशियां था उनके पिता के आने से
आये भी तो तिरंगा में
रंग और रुप का पता नही।।

न हिन्दू था न मुस्लिम
था वह इंसान
घर छोड़ गया था सरहद में
आये थे सुख शांति के लिए।।।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17 वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें