मृत्यु के पश्चात घरवालो की वेदना....
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
किसी का बेटा चला गया,
किसी का बाप था वह।
किसी का भाई था वह,
वह किसी का दादा था।
किसी का पति था वह,
किसी का नाना था वह।
था वह परिवार का हिस्सा,
था वह घर की शान।
जब आई उसकी लाश,
तब पड़े थे सब निराश।
कैसे कहते अब नही हैं?
घर जर्जर हो चुका था।
एक पत्नी की सिंगार सुनी थी,
एक बेटी के आखों में आंसू थी।
एक पिता के चहरे में उदासी थी,
एक माँ के आँखो में आने का खवाब थे।
सम्भाले न सम्भल एक घर,
उनका ख्वाब जिन्दा था।
आँखों में दिख रहे थे वो बार बार,
उनका आवाज दिल में जिन्दा था।
जब लाश रखी थी आँगन में,
सब लोग वहाँ मौजूद थे।
रो रोके हाल था बेहाल,
दिल का हिस्सा टूट गया था।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829
मगसम-2608/2016
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