Hindi

रविवार, 6 नवंबर 2016

मोर छत्तीसगढ़ बने दिखथे

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर विशेष अमित चन्द्रवंशी "सुपा" भाई के कलम ले छत्तीसगढ़ी भाखा म एकठन कविता प्रस्तुत हवय.....

रंग रंग के गोठ ल गड़थे
जमो संगवारी मन बड़थे

छत्तीसगढ़ के रहिया बने रहथे,
अंगरा के रोटी पीठा खाते रहथे।
दुसर के दुख म ख़ुद ह जागथे,
मोर छत्तीसगढ़ बने दिखथे।।

मिलजुल के सबो काम ल करथे,
बारी कोती ल दिन मन निन्दथे।
गाय मन बर पैरा भुसा बोरथे,
बारी म जोंधरी खीरा सुघ्घर बोथे।।

'धान के कटोरा' बर बड़े प्रसिद्ध हवय,
हीरा के खान लदे हवय देवभोग म।
गन्ना लगाथे गुड़ शक्कर बनाये बर,
धान के 'अमित' किस्म पाथे ईहा।।

छत्तीसगढ़ म नदिया है अरपा पैरी,
तांदुला गंगरेल डेम हवय बड़े बड़े।
मोबाइल के जमाना आगे हवय ईहा,
कोनो नई रहय मोबाइल के बिना।।

भोरमदेव हवय खुजराहो बर प्रसिद्ध,
लक्ष्मण मन्दिर हवय एकठन सिरपुर म।
छत्तीसगढ़ के प्रयाग हवय राजिम म,
मोर छत्तीसगढ़ सुघ्घर दिखथे हवय।।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा जिला-कबीरधाम
छत्तीसगढ़ मो.-8085686829
मगसम-2608/2016

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें