अफसोस..!!
बड़ो काआशीर्वाद
सब चाहते है
पैर छूना जानते है
कंधे का बोझ नही
उम्र गुजर जाते है
पैरो में छाले पड़ जाते है
मगर बच्चे को
दिखता नही है
तमाम सीढ़ी बनाये
एक बिस्तर नही बना सके
भूखे रहने नही दिए
चाहते तो तिजोरी भरे रहते
लेकिन खाली कर दिए
तुम्हारे सपनो के लिए
अंतिम दौर में है
कंधे का सहारा नही
लाठी है पकड़ाने वाले दूर
जींद हु मगर
अफ़सोस!!
मेरे पैरों का सहारा नही।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
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