"सावन की बरसात "
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
बादल में वर्षा का आग़ाज हो चुका हैं
सुहानी बादल में काली घटा छाई हुई है
सावन का महीना कवरियो का ढोला हैं
झमझम बरसात का सौगत हो चूका हैं।
ये धरती बरसात से सूंदर हो चला पड़ा
चारो ओर खिलखिलाते हुए फूल फल है
धरती में नए रूप आने को हम जाने को
आज धरती अंबर क्षितिज में मिल पड़े।
सावन की बरसात दिल में प्यार सी आई
मंजनू कि मोहब्बत बरसात साथ लाई हैं
हरियाली नजारा नाग जी साथ आये है
इस मौसम में दिल खफा हो उठ चला है।
चटपटा खाने का मजा सावन में आया हैं
दो दिलो को मिलाने का मौसम आया है
दिन रात वर्षा का बोझ सर पर भरी पड़े
सावन का बरसात किसान के लिए गिरे।।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
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