कलम डगमगाया हैं
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
बने फरिस्ता उड़ चले
कागज का रुख मोड़
कुछ नही हो पाया तो
आगे चलते जायेंगे
अपना जीवन मोड़
कलम डगमगा जायेगा।
आना तुम आगे
विद्या पाठ करायेंगे
ज्ञान मार्ग पर चल कर
जीवन को अमरत्व देंगे
रास्ता मोड़ दिया तो
कलम डगमगा जायेगा।
चलते जा बहुत दूर हैं
एक रास्ता मंजिल तक हैं
मुड़ेगा तो गिरेगा
आगे बढ़ेगा तो जीतेगा
ज्ञान से जीतना सीख
कलम से लड़ना सीख।
कलम डगमगायेगा
इस दुनिया से जायेगा
आज तो लिख और सीख
आगे बढ़ते चले जा
गति लिए बदलाव ला
कलम से प्यार सीख।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें