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सोमवार, 8 अगस्त 2016

बंद करो आंतक का खेल

बंद कर करो आतंक का खेल

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

बहुत हुआ माजरा गम का
रातो की नींद गई आसमां पर
दिन का आस खोता नजर
मनुष लुप्त होते नजर
खुश तो है नही तू
फिर आतंक बन्द कर।

         जर्जर मत कर ये धरती
         कल तेरा भी खाक होगा
         आज जीत का जश्न कर
         कल तेरा भी बर्बाद होगा
         सोच तेरा भी घर हैं
         उनके ऊपर भी बीतेगा कल।

पनप रहा कीड़े की तरह
अंदर से पुरा खा गया
अब तो बंद कर
रोड पर दंगा मत कर
मनुष को चीर मत
आतंक का खेल बन्द कर।

         शिक्षा पर ग़ौर कर
         अब और मत कुचल
         दमन अब खत्म कर
         देश का भविष्य बक्श दे
         ख़ुशी से राज कर
         अब आतंक का खेल बन्द कर।

डूब रहे अब सब
इश्क़ बेशूमार है
अब ख़ुशी रहेगा
तू भी गोता लगा
आजा साथ चले
आतंक बन्द कर।

-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

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