इश्क़ बेपरवाह
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
इश्क़ ने तनहा किया
दिल ने गुनहा किया
रब ने मौका नही दिया
इश्क़ में बेपरवाह हो गया।
प्यार किया इश्क़ बेपरवाह
आँखिया मिला इश्क़ में
रब ने खेल इश्क़ का खेल
इश्क़ में बेपरवाह मैं गया।
मेरा आँखिया उसे ताके
मुझे इश्क़ ने गुमरहा किया
मेरा जिंदगी रब जाने
मेरा इश्क़ उनसे तनहा हैं।
रातों की नींद गई इश्क़ में
आज बेरुखी से मांजरा बने
सपने रूठी रूठी सी लगी
ये इश्क़ बड़ी बेपरवाह निकला।
मेरी आँखिया जो डुलगे
दोस्त किसी से इश्क़ ना कर
इश्क़ मजहब का वास्ता नही
खुद से बनाया दर्द तनहा हैं।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
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