"6अगस्त हीरोशिमा 9अगस्त नागासकी"
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
अमेरिका को कहा पता था कि
वह क्या करने जा रहा हैं,
जापान को आशा कहा था कि उनका विनाश होने वाला हैं।
अमेरिका ने द्वितीय विश्व के अंत में एक बेवकूफ़ी किया,
उस दिन जापान तो जीते जीते मिट्टी में मिल गया था।।
एक परमाणु बम ने जापान की दिशा परिवर्तित कर दिया,
बड़ी धैर्यता पूर्वक अमेरिका ने जापान में प्रहार किया था।
लाखो की तादात में बेगुनहो कि मौत परमाणु बम से हुआ,
आज भी वहाँ कुछ लोगो में विक्लांगता देखने को मिलता हैं।
दुश्मनी थी या परमाणु बम कि प्रेक्षण अमेरिका जाने,
जापान की भूमि तो उस दिन जर्जर हुआ था।
वह जमीन तो अब किसी काम की नही रही,
ना तो कुछ उगा सकते ना कुछ कार्य कर सकते है।
आज जापान को आँख उठाकर देखने की हिम्मत किसी में नही हैं,
अमेरिका तो अब सोच भी नही सकता है जापान पर प्रहार का।
बाबर्ता आ जायेगा उस देश का जो जापान को आँख उठाकर देखे,
देश को मिट्टी में मिल दिया जायेगा जापान कि परमाणु अणु बम ।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
"द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में 6अगस्त और 9अगस्त के दिन आसमाँ भी रोया था धरती भी हैडेक में फटा था उस दिन जापान पूरा रोया था अपना इतिहास में अमेरिका के लिए दुश्मनी नही दोस्त के नजरो से जो देखा था फिर भी जापान मिट्टी में मिल गया।"
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