"बेरुख सा दिल"
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
उड़जा रे पंख रुआ साँझे पड़ी
चारे पहर की बेड़िया खड़ी
तेरे फिकर है रे भाई दिवनी
दिल से न दिल से मानी फिरे ।
चारे पल की ये जिन्दग्नी
मेरे चाह में है प्यारी मासा
मेरे लिये हरदम सब सोचे
तेरे सिवा मेरा कोई जुबानी ।
चल रही है साँसे मेरे हरदम
दिल की बात मंजुनू से पीरे
हरगज दिल न माने मेरी माँ
चारे पहर की बेड़िया खड़ी ।
साँसे तब तक चली जिंदग्नी
पल पल ये दिल मासा पीरी
मेरे महबुब तुम्हें दिल से चाहे
मेरे पास आजा तुम्हें दिल लगा ।
बेरंग है ये दिल दरिया सा
तुझसे मिलने का मन आज
राह चलते जाऊंगा तेरे साथ
हरदम तुम रहना माँ के साथ ।।
-अमित चन्द्रवंशी"सुपा"
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