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शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

बारिस में भींगने का जि करता हैं

बारिस में भींगने का जि करता हैं
                        -अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

इस बारिस में भींगने का मन कर रहा हैं,
जि चाहता हैं कि , खूब उछले बारिस में।
आज कल  मौसम कि  अदा ही कुछ और हैं,
दिन रात देखो असमान में कलि घटा छाई हैं।
इस मौसम में दिन-रात का पता चल रहा हैं,
परन्तु चाँद-सूरज पृथ्वी से अंजान हो गए हैं।।

दिल करता है ,
घर में बैठे ना रहे बारिस में भींगे,
बारिस पड़ी अचानक ट्यूशन गिरे।
मानसुन का  आगाज  हो चूका हैं,
चारों ओर पानी कि बौछार पड़े हैं।
इस मौसम में भींग जाने का मन हैं,
प्यार में लोग अच्छे से शरणगत हैं।।

ये बारिस की मजा ही कुछ ओर हो चला हैं,
जि चाहता  हैं दोस्तों के साथ पानी में भींगे।
दफा ही दफा स्कूल  जाने से लेट  हो रहा हैं,
स्टूडेन्ट बारिस में भींग कर बहाने कर रहे हैं।
ट्यूशन जाने के लिए दोस्तों कि तालाश में हैं,
दोस्त  बारिस  के डर से  घर में ही बैठे पड़े हैं।।

                       -अमित चन्द्रवंशी"सुपा"

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