उड़ते गया
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
पंख है
उड़ जाना हैं
स्वच्छ आकाश में
सबको दिखाना हैं
शोर अभी दिखे
रास्ते जन्म से
लंबी दूर तक
है छटा सुगन्ध का
मन में जीवन
गम की परछाई
दावत नामे थे
मंजिल जो लिखे
गुमराह न हो
रास्ते आसमां
तालुक जन्नत से ।
ये धरती आसमां
परछाई बाकि है
स्वछन्द आकाश की चिड़िया
चहक रही बार-बार
हवा मौसम बिन बरसात
किसानों की चमक
फिकी पड़ती नजर
लौट जाना वक़्त में
वफ़ात की घड़ी बेजान
हैं सभी का अरमान।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-17.5वर्ष विद्यार्थी
10:45एएम 21दिसंबर 2016
रामनगर कवर्धा छत्तीसगढ़
मो.-8085686829
मगसम-2608/2016
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें