आज 16दिसंबर
भारत की बेटी दामिनी भारत के दिल(दिल्ली) में
थी मैं अकेले
उस ग़ुमना रास्ते में
बस के इन्तजार में
खड़ी थी अकेले
जब बस आई
5ने बहन कहकर धोखा दिया।
मेरी मौत
एक गम्भीर विनाश था
मुझे जीना था
उस दरिन्दे को सजा दिलाना था
वफ़ात करीब थी
मुझे कोई बचा नही सके।
थी मैं अंजान
थे वे बदमाश
बहन कहकर पुकारे
मैं बैठ गई बस में
मुझे कहाँ पता ?
इंसान नही हैवानियत हैं।
मैं जीना चाहती थी
पर मुझे बचा न सके
परमात्मा से विनती हैं
कोई बेटी के साथ न हो
मैं बहुत सह ली
पर कोई और नही सहे।
अंधेरे में थी
बहन बोल धोखा दिए
लगता हैं, उनके बहन नही हैं।
दरिंदों ने दौड़ाए बस
रातो रात खबर भी नही लगी
भनक भी नही लगी किसी को
थे वे काले कारनामे वाले।
लाचार थी बेबस थी
देश की बेटी थी
मेरे रक्त के कतरे को मरने मत देना
मुझे इंसाफ दिला नही सके
जेल के सलाखों में बन्द
आज भी हँसता हैं।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-17वर्ष विद्यार्थी
रामनगर कवर्धा छत्तीसगढ़
मो.-8085686829
10:45 एएम 16दिसंबर 2016
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