खेत अऊ किसान मनके राज
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
आगे हवय धान लुवे के बेरा,
आगे हवय सोयाबीन काटे के बेरा।
लेदी ल फेक्टरी म देके बेरा हवय,
किसान मनके चाँदी चाँदी होंगे हवय।
रात दिन काम करथे किसान मन,
खेत म सुघ्घर सुघ्घर फसल बोथे।।
लइका मन घनवारा जाथे चिकिगुर बर,
लेदी म लपेट के छानहि म टांग देथे।
राहेर के दिन आगे हवय चना के आजहि,
लइका मन चोरये बर जाथे मझनीय कुन।
खेत म फुल फर दिखथे अब्बड़ सुघ्घर,
मोर गाँव के खेत संगी सुघ्घर दिखथे।।
अमित कहते अब धान देखे बर नही मिलय,
हारवेस्टर म कटा मिंजा के मण्डी भेज देथे।
नवा नवा मसीन आगे हवय टेक्टर फेसर,
फेर सबो काम आज मसीन म हो जाथे ।
निंदाई कोड़ाई करे बर मनखे मन जाथे,
खेत ल साफ सुधरा करके बीजा ल बोथे।
आजकल चातर अऊ जोते बर टेक्टर आगे,
बीज ल टेक्टर ले बोयें म सीधा पड़थे।
सरसों सुरजमुखी धनिया मेथी मन के पान हे,
खेत संगी सुघ्घर हरियर हरियर दिखथे।।
खेत के पार ह संगी अमित सुघ्घर दिखथे,
सरसों के फुल राहेर के पान बने दिखथे।
आगे हवय चाँदी चाँदी फसल मन के बेरा,
किसान मन के राज हवय खेत म अब्बड़।।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-17वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़
मो.-8085686829
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