दहेज में झुलसती कन्या
सात जन्म तक साथ रहने का साथ,
दुनिया में ना खोने की आस के साथ
जिन्हें जिंदगी साथ चलने के लिये लाये हैं,
उन्हें दहेज के लिए क्यों तड़पते हो......
जिनके बिना पृथ्वी का आस्तित्व नही,
नारी के बिना नर की मोल नही
वफा से रब ने दुआ में दिया तुझे,
तेरे परिवार वाले क्यों उस नारी के पीछे पड़े है......
इस दुनिया में वे तो अकेले जी सकती है,
लेकिन अकेले रहने से कुछ नही हो सकता है
जीवन भर साथ निभाने के लिए आई,
फिर आप दहेज के लालची क्यों हो गए.....
दहेज की मांग में कब तक जले,
अपने को कब तक दुःख में छोड़ दे
एक बार भी नही सोच मेरी बहन भी हैं,
फिर इस तरह वह भी कुचले गई.....
जिन्हें उम्मीद के साथ अपना बनाये थे,
परिवार वालो को छोड़ के आई थी
तेरे घर में उसे कैसे मोल ,
उन्हें दहेज़ के लिये क्यों रुलाए......
एक बार दिल भी नही पिघला,
अपने धर्मपत्नी के साथ क्यों नही बोले
जिन्हें साथ लाये थे सात जन्म के लिए,
फिर दहेज के लिए उन्हें क्यों तड़पते हो.......
-अमित चन्द्रवंशी
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