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मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

जनता की करुणा दशा जल की रूह की ओर

जनता की करुणा दशा जल की रूह की ओर

दिल की   अरमानो  में जल कही  खोया हैं,
मेरे देश में आज जल के लिए जनता रोया हैं
पूरी दुनिया में समुन्दर बहुत जल संजोया है,
आज मेरे देश में जनता के लिए जल की किलत हैं....

आसमान में तारे जिंदगी की उड़ान की हिस्सा है,
मेरे देश में जल की अरमान में जनता रोया हैं
बहुत सारी नदिया झर- झर बह रही हैं,
फिर भी मेरे देश में पल-पल जनता रो रही हैं....

नदी की रूह समुन्दर की उड़ान तक सीमित हैं,
उन्हें मोड़ने की हिम्मत इंसान में जरूरत से है
नदी से एक नहर तो उस छोर में ले जाओ,
मेरे देश की जनता जल की किलत से बच जाये......

जरूरत से ज्यादा जल समुन्दर की ओर जा रही हैं,
उनका रूठ तो मोड़िए जनाब मंत्री महोदय
प्यासे को जल भूमि के लिए अन्न संजोया हैं,
उन मासुमो को जल की किलत से मुक्ति मिले......

समाज की सेवा जान से बढ़कर जीवन हैं,
जल की किलत से मेरा देश खून से लतफत हैं
कैसे कहे देश में शांति भाईचारे है?
मेरे देश में जल के लिए लहुलुहान होने को पड़ा हैं......

एक ओर जल की बौछार से दुनिया भर पड़ी हैं,
एक ओर मेरे देश की जनता जल के लिए रोए हैं
इस देश में जातिवाद जान से बड़ी लाड़ली है,
मेरे देश में आज जल की विकराल समास्या जीवन में हैं......
          
                   -अमित चन्द्रवंशी

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