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शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

गम की छवि इसकदर आया

गम की छवि इसकदर आया...

आह, मैं वापस अब नही आऊंगा
शांत और खामोश गुनगुनी आवाज छुट जायेगा
मेरे यादों में हर पल माँ अब रोयेगी
दादी की वो लोरी बड़ी प्यारी थी
अपने लोरी अकेले अब किसे सुनायेगी?
मेरा शरीर अब नही रहा
माँ पिता तुम रहना हमेशा खुश
दुनिया का हैं दस्तुर
गम को कहना बाय बाय
आँचल में हमेशा मेरी याद आयेगी
शांत रात में महानता की कहानी किसी सुनाओगी?
और मुझे आप बहुत याद आओगी।
प्रभु के पास जा रहा हु
खुल रहे है दरवाजे अलविदा तुम्हे कह गया
अनुमान से जीन अब
मैं नही रहा आपके साथ।
अनंत काल में चले गया
पापा को याद करता हु
पियानो की धुन को ढुंढता हु
अब उस धुन को सुनने वाला कोई नही होगा
किसको पता था क्या हो रहा है हर घन्टे के उस ओर
माँ बस डूब गई
साथ में और भाई बहन दुनिया अलविदा कह दिये
वह गुलाब धुल बन गया
तलवार नही था तलवार बन गया
सुनहरा पल था विष मिल गया ।

कल कानपुर में हुए बस हादसे में मृत और आहात उन मासूमो को नमन् व श्रद्धांजलि! भगवान से दुआ है कभी इसतरह के हादसे न हों।


-स्वरचित अमित चन्द्रवंशी "सुपा" के कलम से
उम्र-17वर्ष विद्यार्थी रामनगर
कवर्धा छत्तीसगढ़
मो.-8085686829
मगसम-2608/2016

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