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सोमवार, 2 जनवरी 2017

नवा बछर आगे

हर साल आथे नवा बछर
फेरभि मनाथन नवा बछर।

काम-बुता करत रहिथेन
एक लिसहनी फेर चढ़गेन।

उमर के बछर कम होंगे
नवा बछर फेर आगे।

जिन्गी के रद्दा गढ़बो
आगु हिरू-हिरु बढ़बो।

नवा बछर म नवा काम करबो
रतिया-दिन सुघ्घर-सुघ्घर रहबो।

12महीना के एक बछर
अजब-गजब दिन देखेला मिलथे।

100बछर के एक एक सदी
हिरु-हिरु बदल जाहि सदी।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

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