मेहंदी
आ हि गई लग्न मेहंदी की
रंगा लिए पिया के नाम का
रहना है उसके साथ सदा
खूबसूरत दिखती है हाथ
मन को भाह लेता है मेहंदी
दो अंजाने मिल बैठ है
आ हि गई घड़ी मिलन की
मेहंदी रची हुई हाथ की
पैरो में अलता लागये है
साथ में मेहंदी की रौनक है
मंगल बेला आ गई
सात फेरे का वक़्त करीब है
बेटी दूसरे घर जाने को है
मेहन्दी की तरह घर को संजोना
चमक लाया हाथों में
चेहरे में मुस्कान लाया
बेटी की विदाई का समय आया
घर मे खुशी की संगीत बजी
मिल बैठे सब
आ हि गई घड़ी विदाई की
बेटी चली अपने ससुराल
मंगल समय आ हि गई
वक़्त है बेटी की विदाई की
मेहंदी चमक रही है
साथ में सुगन्ध छोड़ रही है
आ हि गई घड़ी बेटी की विदाई की...
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-18वर्ष 'विद्यार्थी'
रामनगर,कवर्धा,छत्तीसगढ़
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