Hindi

शनिवार, 22 अप्रैल 2017

"लालबत्ती निकली है जान नही"

"लालबत्ती निकली है जान नही"

नेता जी के गाड़ी से निकल लालबत्ती,
घर से नही निकला है काली सम्पत्ति।      
      जमीं को रातोरात आसियान बना देते है,
      आज भी कालाधन घरो से नही निकला है।

क्या लालबत्ती निकला चेहरे की रौनक चले गई?
कहते है बुद्धिजीवी को समझने चले गई।
      चहरे ऐसे मुर्झया है जैसे दिल निकल गया ,
      काली सम्पत्ति नही लालबत्ती निकल गया।

लालबत्ती के बिन उनकी पहचान अधुरी है,
उनके चहरे की रौनक बहुत कुछ बंया करता है।
       सड़क छाप नेता लालबत्ती से राजनेता बन गया,
       यारो उन्हें समझाओ एक और रास्ता है ।

नेता से अच्छा तो प्रजा है भारत का,
चुपचाप तो रहते है शोषित होते हुए।
         अब तो जागो यारो जरूरत है प्रजा की,
         चुपी लिए मत बैठो यह देश हमारा भी है।

वीआईपी के लिए रुकना नही पड़ेगा,
लालबत्ती निकली सड़क में जाम नही होगा।
         सत्ता के भूखे है हजार लोग नींद से उठो,
          जनता की जरूरत है भारत की माटी को।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
रामनगर कवर्धा छत्तीसगढ़
मो.-8085686829



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें