Hindi

गुरुवार, 23 मार्च 2017

वो इसकदर आ गई

वो वक़्त ही खास था...
                     वो दिन ही खास था...
सुबह न मिले पाये
                     शाम मिल बैठे थे...

कहने को तो कुछ न था
                    मन में इसकदर आ गए
मन में इसकदर बैठ गए
                     मिल गए एक शाम ...

वो दिन याद है
                  बात भी नही किये थे
लड़ाई हुआ था
                  बस बाते कुछ फैक्ट बोल दिया।

युही कहते रहु तो वक़्त गुजर जायेगा
      मैंने अक्सर दिलो को टूटते देखा है..
तुम चले न जाने मुझे किसी हाल में छोड़...
     तुझे चाह लिया है इसकदर भूल न पाऊ....


लफ्जो को समझ लेना
              कलम का सिपाही हु
कलम से उकेर दिया
              बस तू इस दिल को पढ़ लेना.....

बात कुछ खास हो तो कह देना
                 मुझे इंतजार है उस पल का
तुम्हे अपना बना कर रख लूंगा
                  बस ऐतबार का वक़्त निकाल लेना....


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