रंग आया पिचकारी आया,
देश में रंग को सैलाब आया
नागडे की धुन ताल आया हैं,
रंगो का पर्व हर्ष के साथ आया हैं।
होली की याद में जश्न की सैलाब में,
चारों ओर रंग बिरंगे रंगो का जमाव है
होली के साथ मौसम में बदलाव आया है
आसमान में रात ढहकर सुबह आया हैं।
परमात्मा पर विश्वास ना कर भूल कर दिए,
वेदना की आग में होलिका झुलस गई थी।
दिल में बेबसी थी ,
प्यार के लिए रंग बिखेरे थे
कृष्ण की याद में
गौकुल में होली खेले थे।
होली की सौगत आया,
चारो दिशा में प्यार आया
दुश्मनी को भूला कर
सभी में प्यार हुआ है।
गोल पृथ्वी पर इंसान के अलग पहचान हैं,
पशु-पक्षी से भिन्न एक अजुबा इंसान हैं
रंग गुलाल उड़ायेंगे होली का पर्व मनयेंगे
सभी मिल जुलकर पानी का बचाओ करेंगे।
-अमित चन्द्रवंशी
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