इंतजार है
आसमान की ओर नजर
खेत में फसल है
पानी के इंतजार में
अन्नदाता देख रहा
पानी बरसने का इंतजार
खत्म नही हो रहा
फसल लहलहाती नजर आये
पहले पानी तो गिरे
इंतजार है उस समय का
जब धरती आसमान
क्षितिज में मिले
वर्षा ऋतु बीत रही है
पानी का पता नही
चारों तरफ पानी की
हाहाकार मची हुई है
नजर किधर घुमाये
अफसोस और इंतजार
आखिर कब तक
समय बीत रहा है
मिट्टी से जो खुश्बू आती
न जाने वह वक़्त कब आये
फसल जगे या मार जाये
इंतजार पानी का है
भूख तो सभी को है
न जाने कब अन्न खेत से आये
अन्नदाता भी खुश हो जाये
इंतजार है उस वर्षा का
जो फसल के लिये अमृत है।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
बहुत ही सुंदर
जवाब देंहटाएंShukriya
हटाएंNice
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