एक शहादत के जवान को..
जलते हुए संसार से
राख में तब्दील हो रहे
जिस्म पर तिरंगा लपेटे
आग की...
'हाल' में ही आये आप
आभार..!!
लेकिन इस शहादत में आते हुए
चार शोले 'माजी' के
साथ रख ले आते
अमित खुशी होता।
आप लेकिन आ रहे है
सैकड़ो आंखों में
आंसू बन
उन पैरो में अफसोस मगर
अब बचा नही है
आपका समय
इन कंधों का कर्ज उतार
मैं तो क्या...
वो वक़्त में कोई नही
कर पायेगा।
-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
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